कभी-कभी ख़ामोशी ही सबसे ऊँचा जवाब होती है

कभी-कभी ख़ामोशी ही सबसे ऊँचा जवाब होती है


एक समय आता है जब आपको यह एहसास होता है कि जिस इंसान की आप इतनी परवाह करते थे, वह आपको खो देने के डर से नहीं, बल्कि अपनी सुविधा से फैसले ले रहा है।
और सच मानिए — यह एहसास किसी भी झगड़े से ज्यादा दर्द देता है।

क्योंकि जब कोई सच में आपको महत्व देता है,
तो वह दूरी को बातचीत पर नहीं चुनता।
वह अहंकार को रिश्ते की शांति से ऊपर नहीं रखता।
वह आपको धीरे-धीरे दूर जाते हुए देख कर चुप नहीं बैठता।

कोशिश ही प्रेम का सबसे सच्चा रूप है।

अगर कोई बार-बार अपने आराम, अपने ईगो या अपनी उदासीनता को आपसे ऊपर रख रहा है,
तो खुद को दोष देना बंद कर दीजिए।
अपनी कीमत कम करके किसी रिश्ते में टिके रहना प्रेम नहीं होता,
वह सिर्फ डर होता है — खो देने का डर।

कभी-कभी किसी का आपको खो देने के लिए तैयार हो जाना ही वो जवाब होता है,
जिसे आप लंबे समय से ढूँढ रहे थे।

हर वह व्यक्ति जो कहता है कि उसे आपकी परवाह है,
ज़रूरी नहीं कि मुश्किल समय में वह उसे निभाने की हिम्मत भी रखता हो।
और यह स्वीकार करना दर्दनाक जरूर है,
लेकिन गलत नहीं है।

क्योंकि सही लोग —
जो सच में आपकी कीमत समझते हैं —
आपको खोने में सहज नहीं होंगे।
वो बात करेंगे।
वो समझने की कोशिश करेंगे।
वो बीच का रास्ता ढूँढेंगे।

अपने दिल की रक्षा कीजिए।
अपनी कीमत पहचानिए।
और वहाँ रहने की भीख मत माँगिए,
जहाँ कोशिश बोझ लगती हो।

आप कभी ज़्यादा नहीं थे।
आप बस उस इंसान से उम्मीद कर रहे थे,
जो आपको संभालने के लिए बना ही नहीं था।

— Nitin✍️

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